एक व्यंग
झारखंड की राजधानी रांची में आपका स्वागत है। स्वागत इसलिए क्योंकि कहानी का घटनाक्रम इसी शहर में घटित हुआ है। माही यहीं पर सबसे पहले मारना शुरू किया था। खैर मैं जो कहानी लिखने जा रहा हूं उसका न ही माही से कुछ लेना-देना है और न ही रांची से परन्तु ये सत्य है कि कुछ भी परोसने से पहले ढेर सारी मार्केटिंग की जाती है, दिखावा किया जाता है तो मैं भी वही कर रहा था क्योंकि ये एक अद्भुत छल है जो साधारण सी चीज को विशिष्ट बना देता है। मेरी कहानी भी बहुत ही साधारण सी है और ये हर शहर में होता रहता है और हर बस में भी होता है और बी आई टी बस में तो होता ही है तो इसमें असाधारण क्या है। दरसअल बात ये है कि बी आई टी से अधिक लोग मुझे जानते हैं तो अगली बार इस कहानी को कोई पढ़े तो वो पता कर सकता है कि रांची में बीट्स नहीं बी आई टी है और उसी बीआईटी के हम तीन होनहार, मैं और हमारे दो अति साधारण मित्र बस की यात्रा करने निकले थे। वो अति साधारण इसलिए हैं कि मेरे कहानी में चर्चा होने वाले प्रसंग जैसे ही कई अन्य प्रसंग में मैं कई बार दर्शक का किरदार निभा चुका हूं पर उनका ये पहला मौका था। दरअसल हम तीनों कश्मीर फाइल्...